Posts

बिहार का LOCKDOWN भाग-1

Lockdown शब्द हम सभी नया सुन रहे हैं, बहुत सारे लोग इससे अंजान भी थे कुछ को पता भी था कि lockdown हैं क्या? पर क्या आपको पता हैं हमारे बिहार में पूरे 30 साल तक lockdown था,जी हाँ आप सही पढ रहे हैं पूरे 30 साल lockdown था ,चाहे वो 15 साल राजद की सरकार हो या बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की सरकार हो, बिहार के पूरे 30 साल को अच्छी तरह देखा जाए तो कथाकथित 15 साल जंगलराज रहा तथा 15 साल से अभी तक कथाकथित सुशासन बाबू की सरकार रही,इन 30 साल में इन दोनों सरकारों द्वारा बिहार को किस दिशा में लेजाया गया यह तो सभी के सामने हैं। अपनी सत्ता बचाने के लिए दल बदल होता रहा । अब समझते है कैसे lockdown रहा 30 साल तक.... 1. 30 साल मे अपराधिक गतिविधियों पर सिर्फ वैसे ही लगाम लगी है जैसे आज करोना पर लगी हैं,सरकारे यह कहती हैं कि करोना कंट्रोल में हैं पर आकड़े कुछ और बताते हैं,वैसे ही यह बताया जाता है कि अपराध पर लगाम है पर आकड़े पोल खोल देते हैं। 2. सरकारी परियोजनाओं का हाल तो ऐसा हुआ हैं जैसे सरकार द्वारा यह दावा किया जाता हैं कि करोना के मरीजों को इतनी सुविधाएं मिलेगी, पर हकीकत तो यह हो...

मैं बिहार का मज़दूर हूँ

Image
नॉर्वे से पीएचडी रिसर्च करने वाले एक बिहारी अभिषेक रंजन भैया जी ने "#बिहारी_मजदूर" के पीड़ा को अपने क़लम से "मैं बिहार का मज़दूर हूँ।" कहकर सच्चाई को बयां किया है, आप भी जरूर पढ़िए। मैं बिहार का मज़दूर हूँ। हाँ, मैं अमीरों के महल बनाता, सफाई करता, बोरा ढोता , मजदूर होना शायद मेरी फिदरत में ही लिख दिया गया था जब मेरा जन्म बिहार जैसे जगह पे, गरीब परिवार में हुआ था। मैं बिहार का मजदुर हूँ, ना, मजदूर होना मैं नही चाहता था, लेकिन मैं मजबूर था गरीबी से लड़ने में, परिवार चलाने में, कर्ज चुकाने में, बच्चों को पढ़ाने में और जिंदगी की तमाम चुनौतियों का सामना करने में। मैं बिहार का मजदूर हूँ। मुझे नेताओं ने लूटा, मेरे नाम की राजनीति करके आज वो खुद आलीशान बंगलों में रहते हैं। लेकिन मैं बस सालों से झोपड़ी में जन्म लिया ,रहा और शायद यहीं मर भी जाऊंगा। मैं बिहार का ही मजदूर हूँ और मैंने दशकों से जमींदारों की खेत खलिहान जोते, हल चलाये, बैल हांका और एक ग़ुलामी का जीवन बिताया। ये जो शब्द साहेब है न शायद मैंने ही बनाया है अपने हुक्मरानों के लिए। मैं बिहार का मजदूर हूँ मुझे शिक्षा...

CAA और NRC सरल शब्दों मे

NRC और CAA का विषयवस्तु उतना सीधा भी नहीं जितना बताया जा रहा है , कैब (सीएबी) यानी अब सीएए पर जब संसद में हो रही मैं बहस सुन रहा था, तो दोनों पक्ष सरकार और प्रतिपक्ष जितनी सरल शब्दों में इसकी व्याख्या कर रहे थे असल में मामला उतना सीधा है ही नहीं। असल बात दोनों पक्षों ने छिपा ली। सरकार ने अपना दूरगामी लक्ष्य छिपा लिया और विपक्ष ने अपनी हार की तिलमिलाहट छिपाने के लिए संविधान की आड़ ले ली। आइए, अब कुछ बातें बिंदुवार समझने की कोशिश करते हैं। क्या हैं इसके दूरगामी परिणाम ======================= - सीएए के माध्यम से सरकार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के ऐसी जगह पर ऐसा घुटना मारा है जिससे ये तिलमिला तो गए हैं लेकिन अपना दर्द नहीं बयां कर पा रहे हैं। सरकार ने ये बिल लाकर बिना इनका नाम लिए बिना पूरी दुनिया को बता दिया कि इन देशों में अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हो रहा है। - बिल पास होते ही बांग्लादेश को दुनिया के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए कहना पड़ा कि वह अपने सभी नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है। उसने स्वीकार भी किया कि उसके यहां अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हुआ है। - कश्मीर में उत्पीडन...

फौजी बनना इतना आसान नहीं

Image
*मर्द हो तो पढ़ना और दुसरो को भी भेजना* ```फौजी बनना कोई मजाक नहीं है । गाँव का कोई लड़का जब सेना का जवान बनने का सपना देखता है, तो उसकी सुबह रोज़ 4 बजे होती है । उठते ही वह गांव की पगडंडियों पर दौड़ लगाता है, उम्र यही कोई 16-17 साल की होती है । चेहरे पर मासूमियत होती है, और कंधे पर होती है घर की ज़िम्मेदारी । मध्यम वर्ग का वह लड़का, जो सेना में जाने की तैयारी में दिन-रात एक कर देता है, उसके इस एक सपने से घर में बैठी जवान बहन, बूढ़ी मां और समय के साथ कमज़ोर होते पिता की ढ़ेरों उम्मीदें ही नहीं जुड़ी होती हैं, बल्कि जुड़ा होता है एक सच्चे हिन्दुस्तानी होने का फ़र्ज़ । फ़ौजी बनना कोई मज़ाक नहीं है । फौज़ी इस देश की शान है, मान है, और हमारा अभिमान है । देश सेवा के लिए फौजी हमेशा तत्पर रहते हैं । इन्हें न प्रांत से मतलब है और न ही धर्म से, इन्हें तो मतलब है, बस अपने देश से । ऐसे इल्जाम मत लगाओ इन पर, ये सर कटा सकते हैं मगर माँ भारती के दामन पर कोई दाग नहीं लगने देंगे । नमन है सभी सैनिकों को ।। कैसे विकास हो उस देश का ..?             👇 ज...

एक सर्जिकल स्ट्राइक नेताओं पर भी होनी चाहिए

Image
भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। ______ प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात ______ 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभ 1100 करोड़ रूपये। ______ भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। ______ अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है। ______ अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ______ ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। ______ अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर। ______ अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। ______ एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और ...

ऊंची उड़ान तो निश्चित होंगी,बस कोशिश तो करो

Image
बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये । वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे। राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे । राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । “ आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा. “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर , इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।” राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज ...

न बीमार हूँ, न लाचार हूँ, न ग़रीब हूँ, न पैरोकार हूँ, “हाँ मैं लड़ता बिहार हूँ”

Image
कुछ तस्वीरों को देखने का हौसला हैं??? तो झाँक सालों इन तस्वीरों को अगर फटे तो धर लो, और अच्छा हुआ की नही आए हमें बचाने, वरना हम यह भूल जाते “की भगवान के भरोसे काहे बैठे? भगवान तो हमारे भरोसे बैठा होगा.” आज कोई गिला ना हैं, कोई शिकवा ना हैं, बिहार में बाढ़ हैं और हम नज़रअन्दाज़ हैं कोई टीस नही हैं. पूरे देश में मीडिया का नाच हो रहा था जब, केरल में बाढ़ आया, सब रोना शुरू कर दिए जब मुंबई में बाढ़ आया. पुणे में पानी आया तो हर जगह से रिलीफ़ फ़ंड के लिंक शेयर होने लगे. लेकिन हमारा बिहार डूब रहा हैं, ना ये ठीक नही लग रहा हैं लिखने में, बिहारी हूँ मैं कहूँगा अभी “हमारा बिहार लड़ रहा हैं, आगे बढ़ रहा हैं.” आपको बताए चौंकियेगा मत, आप जितनी बाढ़ और ओड़िसा वाले समुन्दर से जितने परेशान होते हैं ना उतनी परेशानी हमारे बिहार में साल में 3 महीने बाढ़ और अगले 3 महीने महामारी से झूझने में लगाते हैं, पर शायद चिल्लाने की हमें आदत नही, हम एक दूसरे का हाथ पकड़ कही फूटपाथ पर तो कही कही NH पर घर बना लेते हैं जानते हैं की ये झोपड़ी 6 महीने से ज़्यादा हमें रख नही पाएगी, और इस 6 महीने में या त...