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Showing posts from April, 2019

RTI लिखने का तरीका

RTI लिखने का तरीका - 👉 🏿RTI मलतब है सूचना का अधिकार - ये कानून हमारे देश में 2005 में लागू हुआ।जिसका उपयोग करके आप सरकार और किसी भी विभाग से सूचना मांग सकते है। जिससे  सरकारी विभागों में पारदर्शिता  बढ़ती है तथा  विभागों में भ्रष्टाचार  को दूर किया जा सकता है। जिसमें आप सभी मुख्य भूमिका निभा सकते हैं।आमतौर पर लोगो को इतना ही पता होता है।परंतु आज मैं आप को इस के बारे में कुछ और रोचक जानकारी देता हूँ - 👉 🏿RTI से आप सरकार से कोई भी सवाल पूछकर सूचना ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप सरकार के किसी भी दस्तावेज़ की जांच कर सकते है। 👉 🏿RTI से आप दस्तावेज़ की प्रमाणित कापी ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप सरकारी कामकाज में इस्तेमाल सामग्री का नमूना ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप किसी भी कामकाज का निरीक्षण कर सकते हैं। 👉 🏿RTI में कौन- कौन सी धारा हमारे काम की है। 👉 🏿धारा 6 (1) - RTI का आवेदन लिखने का धारा है। 👉 🏿धारा 6 (3) - अगर आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है। तो वह विभाग इस को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5 दिन के अंदर भेज देगा। 👉 🏿धारा 7(5)...

साईकिल और बचपन की यारी...

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यह दौर था हमारे साइकिल सीखने का और हमारे जमाने में साइकिल दो चरणों में सीखी जाती थी पहला चरण कैंची और दूसरा चरण गद्दी....... तब साइकिल चलाना इतना आसान नहीं था क्योंकि तब घर में साइकिल बस पापा या दादा चलाया करते थे तब साइकिल की ऊंचाई अड़तालीस (48) इंच  हुआ करती थी जो खड़े होने पर हमारे कंधे के बराबर आती थी ऐसी साइकिल से गद्दी चलाना मुनासिब नहीं होता था। "कैंची" वो कला होती थी जहां हम साइकिल के फ़्रेम में बने त्रिकोण के बीच घुस कर दोनो पैरों को दोनो पैडल पर रख कर चलाते थे । और जब हम ऐसे चलाते थे तो अपना सीना तान कर टेढ़ा होकर हैंडिल के पीछे से चेहरा बाहर निकाल लेते थे, और "क्लींङ क्लींङ" करके घंटी इसलिए बजाते थे ताकी लोग बाग़ देख सकें की लड़कवा साईकिल दौड़ा रहा है । आज की पीढ़ी इस "एडवेंचर" से मरहूम है उन्हे नही पता की आठ दस साल की उमर में अड़तालीस इंच की साइकिल चलाना "जहाज" उड़ाने जैसा होता था। हमने ना जाने कितने दफे अपने घुटने और मुंह तोड़वाए है और गज़ब की बात ये है कि तब दरद भी नही होता था, गिरने के बाद चारो तरफ देख कर चुपचाप खड़े हो जाते ...

अन्न की बर्बादी और भूख। part-2

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अन्न की बर्बादी और भूख यह विडंबना नहीं, उसकी पराकाष्ठा है कि सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज को खुले में छोड़कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेती है। फिर अनाज के खराब होने के जिम्मेदार अधिकारियों.. NEXT हर साल देश में करीब पचास हजार करोड़ रुपए का अनाज बर्बाद हो जाता है। एक ऐसे देश में जहां करोड़ों की आबादी को दो जून ठीक से खाना नहीं नसीब होता, वहां इतनी मात्रा में अनाजों की बर्बादी किस तरह की कहानी कहती है? इसकी पड़ताल कर रहे हैं  रविशंकर । यह विडंबना नहीं, उसकी पराकाष्ठा है कि सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज को खुले में छोड़कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेती है। फिर अनाज के खराब होने के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू होती है और यह जांच तब तक चलती रहती है जब तक वह सेवामुक्त होकर अपने घर नहीं पहुंच जाता है। जबकि संयुक्त राष्ट्र की भूख संबंधी सालाना रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में सबसे ज्यादा भुखमरी के शिकार भारतीय है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एएफओ) ने अपनी रपट ‘द स्टेट ऑफ फूड इनसिक्युरिटी इन द वर्ल्ड 2015’ में यह बात कही है। यह विचारणीय और चिंतनीय...

हर सवाल में तेजाब अभी बाकी हैं।

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ये किसी और कि बेटी थी ,किसी और कि बहन थी ? क्या फर्क पड़ता है बिहार के युवा एवं छात्रों एवं आमलोगों को क्योंकि ये उनकी सगी बेटी -बहन नहीं थी ? लोग चौकीदार बनने एवं न्याय के साथ विकास को आसमान की ऊंचाई से भी ज्यादा ऊपर उठाने में लगे हैं। कुछ लोग संविधान एवं आरक्षण के लिए चिंता जता रहें हैं ? बिहार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी मधेपुरा में 15 दिन से कैम्प किये हुए हैं । D G P बिहार श्री गुप्तेश्वर पांडे जी सिर्फ सोशल मीडिया में अपना प्रवचन दे रहें हैं । गृह सचिव श्री अमीर सुहानी साहब अभी क़ुरआने-शरीफ के आयतों को पढ़ने में व्यस्त हैं । भागलपुर के आयुक्त एवं IG ,DIG एवं DM ,SSP ,City SP सब 18 तारीख को चुनाव सम्पन्न करा -कर छुटियों की लुफ्त उठा रहें । छात्र - युवा IPL में सट्टे लगाकर धनवान बनने में ब्यस्त हैं  डूब मरना चाहिए बिहार के छात्र -युवा एवं आमलोगों क्योंकि यहां जिंदा बचा ही कौन है सिर्फ जिंदा लाशों की भरमार है । आज उस लालड़ी-लालडी सुकोमल लड़की का सबाल ? कल जब हमारी बहने -बेटियों के ऊपर जब कोई मनचला तेजाब फेंक कर जान ले -लेगा तभी जिंदा ह...

अन्न की बर्बादी और भूख। part-2

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NEXT जी हां, संयुक्त राष्ट्र की फूड एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 1300 करोड़ कुंटल खाना किसी न किसी कारण बर्बाद हो जाता है। अमीर देशों में ग्राहक उतना खाना बर्बाद कर देते हैं जितना उप-सहारा अफ्रीका में उत्पादन होता है। स्थिति यह है कि विश्व में आठ में से एक व्यक्ति के पास पर्याप्त खाना नहीं है। जबकि चार-पांच साल पहले अनाज की बढ़ी कीमतों के कारण बारह देशों में दंगे हो गए थे और संयुक्त राष्ट्र को खाद्यान्न संकट पर सम्मेलन बुलाना पड़ा था। बहरहाल, किसी भी देश में जब तक अन्न के उत्पादन, भंडारण और वितरण की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक देश से कुपोषण और भुखमरी को खत्म नहीं किया जा सकता है और न ही अन्न का भंडारण सही तरीके से किया जा सकता है। जबकि सरकारी आंकड़े यह दावा करते नहीं थकते हैं कि हम खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गए हैं। सरकारी दावा को एक हद तक सही माना जा सकता है। लेकिन अन्न के भंडारण और वितरण का अवैज्ञानिक तरीका जहां एक तरफ अन्न के अभाव में भूख से मौत का तांडव करा रहा है, पर दूसरी तरफ हजारों टन अनाज उचित रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो चुक...

एक भूखे पेट का दर्द

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एक #निवेदन #मेरा #आपसे 🙏 #एक #निवेदन #मेरा #आपसे 🙏 दोस्तो एक स्कूल की कक्षा में एक लड़के का वॉल पैन गुम हो गया उसने मास्टर जी से इसकी शिकायत की  मास्टर जी ने बारी बारी करके सभी छात्रो के स्कूल बैग की तलाशी ली परन्तु एक बालक ने बैग की तलाशी देने से इनकार कर दिया  बहुत जोर जबरदस्ती करने पर भी उसने बैग की तलाशी देने से मना कर दिया वो बैग पकड़कर जमीन पर लेट गया मास्टर जी बैग छुड़ाने की कोशिश में लगे रहे  शोर सुनते ही हेड मास्टर साहब कक्षा में आए और बच्चे की भावना को समझते हुऐ उसे अपने रूम में ले गये  हेड मास्टर के समझाने पर बच्चे ने अपना बैग खोलकर मास्टर साहब को दिखाया दोस्तो उस बच्चे के बैग में खाने टुकड़े पड़े हुऐ थे  उसने मास्टर जी को बताया खाने की जब छुट्टी होती है सब बच्चे जो खाना फैक देते है उसे में अपने बैग में रखकर घर ले जाता हूँ घर पर मम्मी पापा भूखे रहते है  मैं उन्ही के लिये ये खाना रोज लेकर जाता हूँ ताकि मेरे मम्मी पापा कही भूख से ना मर जाये  दोस्तो इतना सुनते ही हेड मास्टर साहब की आँखे भर आयी उन्होने बच्चे को गले से लगा लिया ?...