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Showing posts from 2019

CAA और NRC सरल शब्दों मे

NRC और CAA का विषयवस्तु उतना सीधा भी नहीं जितना बताया जा रहा है , कैब (सीएबी) यानी अब सीएए पर जब संसद में हो रही मैं बहस सुन रहा था, तो दोनों पक्ष सरकार और प्रतिपक्ष जितनी सरल शब्दों में इसकी व्याख्या कर रहे थे असल में मामला उतना सीधा है ही नहीं। असल बात दोनों पक्षों ने छिपा ली। सरकार ने अपना दूरगामी लक्ष्य छिपा लिया और विपक्ष ने अपनी हार की तिलमिलाहट छिपाने के लिए संविधान की आड़ ले ली। आइए, अब कुछ बातें बिंदुवार समझने की कोशिश करते हैं। क्या हैं इसके दूरगामी परिणाम ======================= - सीएए के माध्यम से सरकार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के ऐसी जगह पर ऐसा घुटना मारा है जिससे ये तिलमिला तो गए हैं लेकिन अपना दर्द नहीं बयां कर पा रहे हैं। सरकार ने ये बिल लाकर बिना इनका नाम लिए बिना पूरी दुनिया को बता दिया कि इन देशों में अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हो रहा है। - बिल पास होते ही बांग्लादेश को दुनिया के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए कहना पड़ा कि वह अपने सभी नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है। उसने स्वीकार भी किया कि उसके यहां अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हुआ है। - कश्मीर में उत्पीडन...

फौजी बनना इतना आसान नहीं

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*मर्द हो तो पढ़ना और दुसरो को भी भेजना* ```फौजी बनना कोई मजाक नहीं है । गाँव का कोई लड़का जब सेना का जवान बनने का सपना देखता है, तो उसकी सुबह रोज़ 4 बजे होती है । उठते ही वह गांव की पगडंडियों पर दौड़ लगाता है, उम्र यही कोई 16-17 साल की होती है । चेहरे पर मासूमियत होती है, और कंधे पर होती है घर की ज़िम्मेदारी । मध्यम वर्ग का वह लड़का, जो सेना में जाने की तैयारी में दिन-रात एक कर देता है, उसके इस एक सपने से घर में बैठी जवान बहन, बूढ़ी मां और समय के साथ कमज़ोर होते पिता की ढ़ेरों उम्मीदें ही नहीं जुड़ी होती हैं, बल्कि जुड़ा होता है एक सच्चे हिन्दुस्तानी होने का फ़र्ज़ । फ़ौजी बनना कोई मज़ाक नहीं है । फौज़ी इस देश की शान है, मान है, और हमारा अभिमान है । देश सेवा के लिए फौजी हमेशा तत्पर रहते हैं । इन्हें न प्रांत से मतलब है और न ही धर्म से, इन्हें तो मतलब है, बस अपने देश से । ऐसे इल्जाम मत लगाओ इन पर, ये सर कटा सकते हैं मगर माँ भारती के दामन पर कोई दाग नहीं लगने देंगे । नमन है सभी सैनिकों को ।। कैसे विकास हो उस देश का ..?             👇 ज...

एक सर्जिकल स्ट्राइक नेताओं पर भी होनी चाहिए

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भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। ______ प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात ______ 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभ 1100 करोड़ रूपये। ______ भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। ______ अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है। ______ अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ______ ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। ______ अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर। ______ अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। ______ एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और ...

ऊंची उड़ान तो निश्चित होंगी,बस कोशिश तो करो

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बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये । वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे। राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे । राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । “ आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा. “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर , इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।” राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज ...

न बीमार हूँ, न लाचार हूँ, न ग़रीब हूँ, न पैरोकार हूँ, “हाँ मैं लड़ता बिहार हूँ”

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कुछ तस्वीरों को देखने का हौसला हैं??? तो झाँक सालों इन तस्वीरों को अगर फटे तो धर लो, और अच्छा हुआ की नही आए हमें बचाने, वरना हम यह भूल जाते “की भगवान के भरोसे काहे बैठे? भगवान तो हमारे भरोसे बैठा होगा.” आज कोई गिला ना हैं, कोई शिकवा ना हैं, बिहार में बाढ़ हैं और हम नज़रअन्दाज़ हैं कोई टीस नही हैं. पूरे देश में मीडिया का नाच हो रहा था जब, केरल में बाढ़ आया, सब रोना शुरू कर दिए जब मुंबई में बाढ़ आया. पुणे में पानी आया तो हर जगह से रिलीफ़ फ़ंड के लिंक शेयर होने लगे. लेकिन हमारा बिहार डूब रहा हैं, ना ये ठीक नही लग रहा हैं लिखने में, बिहारी हूँ मैं कहूँगा अभी “हमारा बिहार लड़ रहा हैं, आगे बढ़ रहा हैं.” आपको बताए चौंकियेगा मत, आप जितनी बाढ़ और ओड़िसा वाले समुन्दर से जितने परेशान होते हैं ना उतनी परेशानी हमारे बिहार में साल में 3 महीने बाढ़ और अगले 3 महीने महामारी से झूझने में लगाते हैं, पर शायद चिल्लाने की हमें आदत नही, हम एक दूसरे का हाथ पकड़ कही फूटपाथ पर तो कही कही NH पर घर बना लेते हैं जानते हैं की ये झोपड़ी 6 महीने से ज़्यादा हमें रख नही पाएगी, और इस 6 महीने में या त...

भव्य और ऊँची उड़ान

*********** **** भव्य और ऊँची उड़ान **** ************* बाज लगभग 70 वर्ष जीता है,परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं- 1) पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। 2) चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। 3) पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं। भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना.... तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं। उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे... या फिर स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में। जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा। बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है। वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है, और तब ...

बाज के बच्चे मुँडेर पर नहीं उड़ते।

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#Motivation *"बाज़"* ऐसा पक्षी जिसे हम ईगल भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी भी ओर की नही होती। मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Kmt. ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर आधुनिक जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है। धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Kmt. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है। अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह...

प्यार की कीमत

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एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक से उसे लगा की,उसकी बहन पीछे रह गयी है। वह रुका, पीछे मुडकर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है। लडका पीछे आता है और बहन से पुछता है, "कुछ चाहिये तुम्हे ?" लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी है। दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ .... अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पुछा, "सर, कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?" दुकानदार एक शांत व्यक्ती है, उसने जीवन के कई उतार चढाव देखे होते है। उन्होने बडे प्यार और अपनत्व से बच्चे से पुछा, "बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो?" बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोडी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर लायी थी। दुकानदार वो सब लेकर युं गिनता है जैसे पैसे गिन रहा हो। सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ ...

बुढापे का दर्द

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"मम्मा ये बताओ, दादा दादी आपको बहुत परेशान करते हैं ना.." "हाँ बेटा पर क्या कर सकते हैं.. अब हैं यहाँ तो झेलना ही पड़ेगा |" "पर क्यूँ मम्मा... क्यूँ झेलना पड़ेगा" "तुम नही समझोगे रहने दो" "एक काम करते हैं मम्मा, इन दोनो को चाचा चाची के घर भेज देते हैं" "वो वहाँ दो दिन भी नही रह पायेंगे बेटा.. चाची तो दादी को देखते ही तुनक जाती है और चाचा तो तुम्हारे चाची के पल्ले से ऐसे बँधे हैं कि वो उतना ही सुनते हैं जितना चाची कहती है | वहाँ इनका कोई गुज़ारा नही होने वाला | " "तो बुआ को बोल दो ना ये उनके भी तो माँ पापा हैं ना , वो ही ले जायें कुछ दिनों के लिए इन दोनो को| " "तुम भी ना बड़े भोले हो बेटा.. वहाँ नही जायेंगे दादा दादी.. ढकोसला करेंगे कि हम तो बेटी के घर का पानी भी नही पी सकते तो वहाँ जा कर रहेंगे कैसे और अगर रहने को तैयार हो भी गये तो तुम्हारी बुआ के पचासों बहाने निकल आयेंगे | वो कम थोड़े ना है, वो भी तो अपनी माँ पर ही गयी है | " "क्या मम्मा मतलब कोई इन्हे अपने साथ नही रखना चाहता | एक काम क...

देखो बापू रोटी लाया..

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डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का, फिर वही सब्जी, रोटी और दाल में तड़का...? मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा, रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगा! बच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई... बाहर थे कुत्ता और आदमी, दोनों रोटी की तरफ लपके.. कुत्ता आदमी पर भोंका, आदमी ने रोटी में खुद को झोंका और हाथों से दबाया.. कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया.. दोनों भिड़े जानवरों की तरह एक तो था ही जानवर, दूसरा भी बन गया था जानवर.. आदमी ज़मीन पर गिरा, कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा कुत्ता गुर्रा रहा था और अब आदमी कुत्ता है या कुत्ता आदमी है कुछ भी नहीं समझ आ रहा था... नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया, हाथ में एक पत्थर आया कुत्ता कांय-कांय करता भागा.. आदमी अब जैसे नींद से जागा हुआ खड़ा और लड़खड़ाते कदमों से चल पड़ा.... वह कराह रहा था रह-रह कर हाथों से खून टपक रहा था बहते खून के साथ ही आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा.. झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया और ख़ुशी से चिल्लाया.. आ जाओ, सब आ जाओ बापू रोटी लाया, देखो बापू रोटी लाया, देखो बापू रोटी लाया..

RTI लिखने का तरीका

RTI लिखने का तरीका - 👉 🏿RTI मलतब है सूचना का अधिकार - ये कानून हमारे देश में 2005 में लागू हुआ।जिसका उपयोग करके आप सरकार और किसी भी विभाग से सूचना मांग सकते है। जिससे  सरकारी विभागों में पारदर्शिता  बढ़ती है तथा  विभागों में भ्रष्टाचार  को दूर किया जा सकता है। जिसमें आप सभी मुख्य भूमिका निभा सकते हैं।आमतौर पर लोगो को इतना ही पता होता है।परंतु आज मैं आप को इस के बारे में कुछ और रोचक जानकारी देता हूँ - 👉 🏿RTI से आप सरकार से कोई भी सवाल पूछकर सूचना ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप सरकार के किसी भी दस्तावेज़ की जांच कर सकते है। 👉 🏿RTI से आप दस्तावेज़ की प्रमाणित कापी ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप सरकारी कामकाज में इस्तेमाल सामग्री का नमूना ले सकते है। 👉 🏿RTI से आप किसी भी कामकाज का निरीक्षण कर सकते हैं। 👉 🏿RTI में कौन- कौन सी धारा हमारे काम की है। 👉 🏿धारा 6 (1) - RTI का आवेदन लिखने का धारा है। 👉 🏿धारा 6 (3) - अगर आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है। तो वह विभाग इस को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5 दिन के अंदर भेज देगा। 👉 🏿धारा 7(5)...

साईकिल और बचपन की यारी...

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यह दौर था हमारे साइकिल सीखने का और हमारे जमाने में साइकिल दो चरणों में सीखी जाती थी पहला चरण कैंची और दूसरा चरण गद्दी....... तब साइकिल चलाना इतना आसान नहीं था क्योंकि तब घर में साइकिल बस पापा या दादा चलाया करते थे तब साइकिल की ऊंचाई अड़तालीस (48) इंच  हुआ करती थी जो खड़े होने पर हमारे कंधे के बराबर आती थी ऐसी साइकिल से गद्दी चलाना मुनासिब नहीं होता था। "कैंची" वो कला होती थी जहां हम साइकिल के फ़्रेम में बने त्रिकोण के बीच घुस कर दोनो पैरों को दोनो पैडल पर रख कर चलाते थे । और जब हम ऐसे चलाते थे तो अपना सीना तान कर टेढ़ा होकर हैंडिल के पीछे से चेहरा बाहर निकाल लेते थे, और "क्लींङ क्लींङ" करके घंटी इसलिए बजाते थे ताकी लोग बाग़ देख सकें की लड़कवा साईकिल दौड़ा रहा है । आज की पीढ़ी इस "एडवेंचर" से मरहूम है उन्हे नही पता की आठ दस साल की उमर में अड़तालीस इंच की साइकिल चलाना "जहाज" उड़ाने जैसा होता था। हमने ना जाने कितने दफे अपने घुटने और मुंह तोड़वाए है और गज़ब की बात ये है कि तब दरद भी नही होता था, गिरने के बाद चारो तरफ देख कर चुपचाप खड़े हो जाते ...

अन्न की बर्बादी और भूख। part-2

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अन्न की बर्बादी और भूख यह विडंबना नहीं, उसकी पराकाष्ठा है कि सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज को खुले में छोड़कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेती है। फिर अनाज के खराब होने के जिम्मेदार अधिकारियों.. NEXT हर साल देश में करीब पचास हजार करोड़ रुपए का अनाज बर्बाद हो जाता है। एक ऐसे देश में जहां करोड़ों की आबादी को दो जून ठीक से खाना नहीं नसीब होता, वहां इतनी मात्रा में अनाजों की बर्बादी किस तरह की कहानी कहती है? इसकी पड़ताल कर रहे हैं  रविशंकर । यह विडंबना नहीं, उसकी पराकाष्ठा है कि सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज को खुले में छोड़कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेती है। फिर अनाज के खराब होने के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू होती है और यह जांच तब तक चलती रहती है जब तक वह सेवामुक्त होकर अपने घर नहीं पहुंच जाता है। जबकि संयुक्त राष्ट्र की भूख संबंधी सालाना रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में सबसे ज्यादा भुखमरी के शिकार भारतीय है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एएफओ) ने अपनी रपट ‘द स्टेट ऑफ फूड इनसिक्युरिटी इन द वर्ल्ड 2015’ में यह बात कही है। यह विचारणीय और चिंतनीय...

हर सवाल में तेजाब अभी बाकी हैं।

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ये किसी और कि बेटी थी ,किसी और कि बहन थी ? क्या फर्क पड़ता है बिहार के युवा एवं छात्रों एवं आमलोगों को क्योंकि ये उनकी सगी बेटी -बहन नहीं थी ? लोग चौकीदार बनने एवं न्याय के साथ विकास को आसमान की ऊंचाई से भी ज्यादा ऊपर उठाने में लगे हैं। कुछ लोग संविधान एवं आरक्षण के लिए चिंता जता रहें हैं ? बिहार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी मधेपुरा में 15 दिन से कैम्प किये हुए हैं । D G P बिहार श्री गुप्तेश्वर पांडे जी सिर्फ सोशल मीडिया में अपना प्रवचन दे रहें हैं । गृह सचिव श्री अमीर सुहानी साहब अभी क़ुरआने-शरीफ के आयतों को पढ़ने में व्यस्त हैं । भागलपुर के आयुक्त एवं IG ,DIG एवं DM ,SSP ,City SP सब 18 तारीख को चुनाव सम्पन्न करा -कर छुटियों की लुफ्त उठा रहें । छात्र - युवा IPL में सट्टे लगाकर धनवान बनने में ब्यस्त हैं  डूब मरना चाहिए बिहार के छात्र -युवा एवं आमलोगों क्योंकि यहां जिंदा बचा ही कौन है सिर्फ जिंदा लाशों की भरमार है । आज उस लालड़ी-लालडी सुकोमल लड़की का सबाल ? कल जब हमारी बहने -बेटियों के ऊपर जब कोई मनचला तेजाब फेंक कर जान ले -लेगा तभी जिंदा ह...