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Showing posts from September, 2019

न बीमार हूँ, न लाचार हूँ, न ग़रीब हूँ, न पैरोकार हूँ, “हाँ मैं लड़ता बिहार हूँ”

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कुछ तस्वीरों को देखने का हौसला हैं??? तो झाँक सालों इन तस्वीरों को अगर फटे तो धर लो, और अच्छा हुआ की नही आए हमें बचाने, वरना हम यह भूल जाते “की भगवान के भरोसे काहे बैठे? भगवान तो हमारे भरोसे बैठा होगा.” आज कोई गिला ना हैं, कोई शिकवा ना हैं, बिहार में बाढ़ हैं और हम नज़रअन्दाज़ हैं कोई टीस नही हैं. पूरे देश में मीडिया का नाच हो रहा था जब, केरल में बाढ़ आया, सब रोना शुरू कर दिए जब मुंबई में बाढ़ आया. पुणे में पानी आया तो हर जगह से रिलीफ़ फ़ंड के लिंक शेयर होने लगे. लेकिन हमारा बिहार डूब रहा हैं, ना ये ठीक नही लग रहा हैं लिखने में, बिहारी हूँ मैं कहूँगा अभी “हमारा बिहार लड़ रहा हैं, आगे बढ़ रहा हैं.” आपको बताए चौंकियेगा मत, आप जितनी बाढ़ और ओड़िसा वाले समुन्दर से जितने परेशान होते हैं ना उतनी परेशानी हमारे बिहार में साल में 3 महीने बाढ़ और अगले 3 महीने महामारी से झूझने में लगाते हैं, पर शायद चिल्लाने की हमें आदत नही, हम एक दूसरे का हाथ पकड़ कही फूटपाथ पर तो कही कही NH पर घर बना लेते हैं जानते हैं की ये झोपड़ी 6 महीने से ज़्यादा हमें रख नही पाएगी, और इस 6 महीने में या त...

भव्य और ऊँची उड़ान

*********** **** भव्य और ऊँची उड़ान **** ************* बाज लगभग 70 वर्ष जीता है,परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं- 1) पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। 2) चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। 3) पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं। भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना.... तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं। उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे... या फिर स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में। जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा। बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है। वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है, और तब ...