न बीमार हूँ, न लाचार हूँ, न ग़रीब हूँ, न पैरोकार हूँ, “हाँ मैं लड़ता बिहार हूँ”
कुछ तस्वीरों को देखने का हौसला हैं??? तो झाँक सालों इन तस्वीरों को अगर फटे तो धर लो, और अच्छा हुआ की नही आए हमें बचाने, वरना हम यह भूल जाते “की भगवान के भरोसे काहे बैठे? भगवान तो हमारे भरोसे बैठा होगा.”
आज कोई गिला ना हैं, कोई शिकवा ना हैं, बिहार में बाढ़ हैं और हम नज़रअन्दाज़ हैं कोई टीस नही हैं. पूरे देश में मीडिया का नाच हो रहा था जब, केरल में बाढ़ आया, सब रोना शुरू कर दिए जब मुंबई में बाढ़ आया. पुणे में पानी आया तो हर जगह से रिलीफ़ फ़ंड के लिंक शेयर होने लगे. लेकिन हमारा बिहार डूब रहा हैं, ना ये ठीक नही लग रहा हैं लिखने में, बिहारी हूँ मैं कहूँगा अभी “हमारा बिहार लड़ रहा हैं, आगे बढ़ रहा हैं.”
आपको बताए चौंकियेगा मत, आप जितनी बाढ़ और ओड़िसा वाले समुन्दर से जितने परेशान होते हैं ना उतनी परेशानी हमारे बिहार में साल में 3 महीने बाढ़ और अगले 3 महीने महामारी से झूझने में लगाते हैं, पर शायद चिल्लाने की हमें आदत नही, हम एक दूसरे का हाथ पकड़ कही फूटपाथ पर तो कही कही NH पर घर बना लेते हैं जानते हैं की ये झोपड़ी 6 महीने से ज़्यादा हमें रख नही पाएगी, और इस 6 महीने में या तो प्रसासन या आफ़त दोनो में जो पहले आ जाए हमें हमारी औक़ात दिखा दी जाती हैं. ये औक़ात का मतलब लड़ने से हैं.
आज कोई गिला ना हैं, कोई शिकवा ना हैं, बिहार में बाढ़ हैं और हम नज़रअन्दाज़ हैं कोई टीस नही हैं. पूरे देश में मीडिया का नाच हो रहा था जब, केरल में बाढ़ आया, सब रोना शुरू कर दिए जब मुंबई में बाढ़ आया. पुणे में पानी आया तो हर जगह से रिलीफ़ फ़ंड के लिंक शेयर होने लगे. लेकिन हमारा बिहार डूब रहा हैं, ना ये ठीक नही लग रहा हैं लिखने में, बिहारी हूँ मैं कहूँगा अभी “हमारा बिहार लड़ रहा हैं, आगे बढ़ रहा हैं.”
आपको बताए चौंकियेगा मत, आप जितनी बाढ़ और ओड़िसा वाले समुन्दर से जितने परेशान होते हैं ना उतनी परेशानी हमारे बिहार में साल में 3 महीने बाढ़ और अगले 3 महीने महामारी से झूझने में लगाते हैं, पर शायद चिल्लाने की हमें आदत नही, हम एक दूसरे का हाथ पकड़ कही फूटपाथ पर तो कही कही NH पर घर बना लेते हैं जानते हैं की ये झोपड़ी 6 महीने से ज़्यादा हमें रख नही पाएगी, और इस 6 महीने में या तो प्रसासन या आफ़त दोनो में जो पहले आ जाए हमें हमारी औक़ात दिखा दी जाती हैं. ये औक़ात का मतलब लड़ने से हैं.
PM ने कुछ मुँह नही खोला, CM ने कुछ नही बोला, पूरा INDIA सोच रहा हैं की यहा मदद की क्या ज़रूरत यहा तो हर साल यही हाल हैं. बिहारी, बीमारी, भिखारी यही सोचते हैं ना आप माननीय Rest of India, अरे चुप कर! औक़ात नही तुम्हारी हमारे जैसा हौसले पालने की, IAS, IPS, IIT, AIIMS वाले से लेकर समाजसेवी तक सब इस धरती की उपज हैं. औक़ात नही तमहरिं चेहरे पर मुस्कान लेकर निकलने की जब पता हो तुम्हें “की पता नही इस बार की बाढ़ में मेरा गाँव बचेगा की नही.” हम तब भी मुस्कुराते हैं, ख़्वाबों को सच कर जाते हैं.
आए थे इस बाढ़ में भी कुछ चैनल वाले, लेकिन किसी को ये मुख्य ख़बर नही लगा, किसी चुतिये चैनल को कुछ नेताओ के घर “ये देखे राजीव प्रताप का घर डूब गया”, “रामविलास का बाँगला डूब गया.” और अब रूख करते हैं आगे की ख़बरों पर. से ज़्यादा कुछ नही सूझा.
उड़ीसा में अलर्ट आया, हर जगह से मदद के लिए चंदे भेजे जाने लागे, बिहार से भी कई करोड़ भेजे गए, बिहारी छात्रों ने भुबनेश्वर में जान की बाज़ी लगा दी, केरल में बाढ़ आया, बिहारी लोगों ने केले के थम से नाव बना दिया, ख़ुद मरा था जो आदमी और 13 को घर से निकाला था वो राम कुमार भी बिहारी था. लेकिन जो महानुभावों को वो भीषण अलर्ट दिखा था वो सब अंधे कैसे हो गए की 3 महीने से बिहार रेड अलर्ट पर हैं, भागलपुर पटना सीतामढ़ी मुज़फ़रपुर बर्बाद हो रहा था और किसी को चू तक नही हुआ.



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