अन्न की बर्बादी और भूख। part-2
NEXT जी हां, संयुक्त राष्ट्र की फूड एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 1300 करोड़ कुंटल खाना किसी न किसी कारण बर्बाद हो जाता है। अमीर देशों में ग्राहक उतना खाना बर्बाद कर देते हैं जितना उप-सहारा अफ्रीका में उत्पादन होता है। स्थिति यह है कि विश्व में आठ में से एक व्यक्ति के पास पर्याप्त खाना नहीं है। जबकि चार-पांच साल पहले अनाज की बढ़ी कीमतों के कारण बारह देशों में दंगे हो गए थे और संयुक्त राष्ट्र को खाद्यान्न संकट पर सम्मेलन बुलाना पड़ा था। बहरहाल, किसी भी देश में जब तक अन्न के उत्पादन, भंडारण और वितरण की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक देश से कुपोषण और भुखमरी को खत्म नहीं किया जा सकता है और न ही अन्न का भंडारण सही तरीके से किया जा सकता है। जबकि सरकारी आंकड़े यह दावा करते नहीं थकते हैं कि हम खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गए हैं। सरकारी दावा को एक हद तक सही माना जा सकता है। लेकिन अन्न के भंडारण और वितरण का अवैज्ञानिक तरीका जहां एक तरफ अन्न के अभाव में भूख से मौत का तांडव करा रहा है, पर दूसरी तरफ हजारों टन अनाज उचित रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो चुक...